Friday, May 22, 2020

छत्तीसगढ़ के महासमुन्द से द्रोपती साहू "सरसिज" की रचना- बंजारा

द्रोपती साहू "सरसिज"
जिला - महासमुन्द, छत्तीसगढ़
शीर्षक:मैं बंजारा"स्वच्छंद"
विधा- तुकांत कविता
                     *****
एक जगह कब ठहरा हूँ,
        आज यहाँ कल रहूँ वहाँ।
निश्चित है न मेरा ठिकाना,
         नहीं जानूँ कब रहूँ कहाँ।।

मोह नहीं मुझे एक ठौर से,
        मैं घट घट का रहने वाला।
प्रेम बाँटता फिरूँ मगन मैं,
        निर्मल मेरा मन मतवाला।।

चिंता नहीं है भविष्य की,
         धन संचय की आस नहीं।
आज को मैं जी भर जी लूँ,
         वैभवता में विश्वास नहीं।।

जग सारा यह है मेरा घर,
         घुमता रहता हूँ आवारा।
रहने को एक छाँव चाहता,
         स्वच्छंद मैं बेघर बंजारा।।
                     *****
                  द्रोपती साहू "सरसिज"

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