जिला- राजनांदगाँव (छ.ग.)
शीर्षक - कुर्सी का रोल
आओ संगी तुम्हे बताऊँ
कुर्सी का कितना रोल है !
कुर्सी ही बताता है,
किसमें कितना पोल है !!
सब लगा है देखों संगी
कुर्सी के दौड़ में !
चोर उचक्के आगे भागे ,
इस कुर्सी के दौड़ में !!
कुर्सी के चक्कर में देखों,
रिश्ते- नाते न जाने !
जैसा भी हो मिल जाए ,
कुर्सी को खुदा माने !!
कुर्सी सब कुछ जानता है
किसका कितना मोल है !!
इसे पाने के चाहत में
जनता से करते हैं हाय -हाय !
एकबार कुर्सी मिल गई तो फिर
जनता को बाय- बाय !!
नेता हो या बाबू देखों
कैसे बने हैं इसके पुजारी !
कुर्सी के नीचे से लेते ,
नहीं चलतीं है उधारी !!
हर व्यक्ति के बारे में जाने कुर्सी
किसका कितना बोल है !
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दूजराम साहू
अति सुंदर
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