Wednesday, May 20, 2020

छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव से प्रवीण कुमार ठाकुर की रचना

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रचनाकार  -- प्रवीण कुमार ठाकुर
जिला       -- राजनांदगाँव (छ.ग.)
विधा        -- कविता ( हास्य रस)
शीर्षक     -- "मंधु के अंतस के   
                   पीरा" ।
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होगे रे लाकडाउन ,
               आगे रे कोरोना ।
भट्ठी ह खुलत नई हे , 
               परगे रे रोना ।।
अंतस के पीरा ल ,
               का मैं हर कहंव ।
बिन पीये शराब मैं ,
               जीये नई सकंव ।।
जेन मजा पियई म ,
               घर कुरिया म नई हे ।
पियई मोर काम बुता ,
               अउ कुछु बुता नई हे।।
खिसियाथे बड़ घर म सब ,
          थोरकन मुँहू रीता नई हे ।
घर म भड़कथे दाई बाई हर ,
          तोर बर काम बुता नई हे।।
पी ले बस दु घुँट ताहन ,
           फेर होस कहाँ अब  हे ।
लहुट के मैं जवाब देवंव ,
           तन म मोर रोस कहाँ हे ।।
राखंव मैं गोड़ ल कहाँ ,
           पांव माड़त कते कर हे ।
रेंगंथों मैं विहि रद्दा म ,
           जेन रद्दा म दारु भट्ठी हे ।।
गिर गिर के संभलना कोई ,
           हमर मन ले सीखे ।
छोड़ चल दिस  सब संगी ,
           संग कोनो नई दीखे ।।
गिर गेन जिहाँ पीके बेसुध ,
        ऊहाँ रात बिता देथँन ।
होस बिहनिया आथे तब ,
       धुर्रा झाड़त घर चल देथन।।
ले ले के उधारी पईसा ,
          जम्मो पी के उडा़ देथन ।
चंगुल म सेठ सहुकार के ,
          हम खुद ल फँसा लेथन।।
हमी मन तो देश के अर्थ 
         व्यवस्था के अधार आवन ।
कोई दे दे सहारा थोरकिन ,
   लड़खडा़वत घर कईसे जावन।।
पाँच के लगईय्या हर ,
             पच्चीस लग जाए ।
बिना पीये नई छोड़न ,
            चाहे पुलिस लग जाए ।।
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व्याख्या :-
            प्रस्तुत सम्पूर्ण कविता में रचनाकार हर व्यंग्यात्मक  रुप  से दारू पियईया के मनः  स्थिति  के मनोदशा के चित्रण करे के प्रयास करे हे अउ कईसे  शराबी   मनखे अपन आप ल देश के अर्थ व्यवस्था के आधार स्तंभ बताथे। जबकि पिये हालत म खुद रेंग नई सकै ।ये कर रचनाकार सर सरकार के ये बेवस्था पर व्यंग्य  करे  के  प्रयास करे हे  कि सरकार हर भट्ठी ल अपन आय के आधार मान के ऐला कभू बंद करे के प्रयास नई करे , शराब के पिये के आदत अपन साथ अउ कई सामाजिक बुराई ल पैदा करथे  । ये व्यंग्यात्मक कविता के माध्यम ले मैं दारू के समाज के ऊपर  पड़त बुरा असर ल उजागर करे के कोशिश करे हों  ।।

          

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