लखीमपुर (खीरी) उ०प्र
9919881145
-:मुक्तक:-
स्वयं दिल के ही हांथो हम, हुए मजबूर बैठे हैं।
तुम्हारे इश्क में हम भी, हुए मशहूर बैठे हैं।
कोरोना से कहीं हम-तुम, प्रभावित हो नही जाएं।
मुहब्बत है सनम तुमसे, तभी हम दूर बैठे हैं।।
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तुम्हारा प्रेम स्वासों में, मेरे हरदम धड़कता है।
मिला जो था वहां अनुभव,होठों पर फड़कता है।
कहूँ शब्दों मे कैसे मैं, मिला जो था वहां मुझको-
वो मेरे मन मे रहकर प्यार से हरदम महकता है।
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दर्द देना प्यार में आदत तुम्हारी बन गयी है।
चोट देना मुस्कुरा कर आदत तुम्हारी बन गयी है।
जानता हूँ 'जी' नही सकते, हमारे प्यार बिन तुम-
आपसी तकरार की आदत तुम्हारी बन गयी है।
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दिल हमारा रो रहा है, अश्रु तेरे बह रहे क्यों।
होंठ हैं खामोश मेरे, ये नयन कुछ कह रहे क्यों।
बाँटते हो दर्द मेरा, क्यों मेरे हमदर्द बनकर-
ताप ये मेरे घुटन की, साथ में तुम सह रहे क्यों।।
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बहुत सुन्दर। बधाई और शुभकामनाएं। शिवेंद्र जी।
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