Monday, April 20, 2020

उत्तरप्रदेश से शिवेन्द्र मिश्र 'शिव' की रचना

शिवेन्द्र मिश्र 'शिव'
लखीमपुर (खीरी) उ०प्र
9919881145

-:मुक्तक:-
 स्वयं दिल के ही हांथो हम,   हुए मजबूर बैठे हैं।
तुम्हारे इश्क में हम भी,     हुए  मशहूर  बैठे  हैं।
कोरोना से कहीं हम-तुम, प्रभावित हो नही जाएं।
मुहब्बत  है  सनम तुमसे,   तभी हम दूर बैठे हैं।।
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तुम्हारा  प्रेम  स्वासों में, मेरे  हरदम धड़कता है।
मिला जो था वहां अनुभव,होठों पर फड़कता है।
कहूँ शब्दों मे कैसे मैं, मिला जो था वहां मुझको-
वो मेरे मन मे रहकर प्यार से हरदम महकता है।
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दर्द  देना  प्यार में आदत तुम्हारी  बन  गयी  है।
चोट देना मुस्कुरा कर आदत तुम्हारी बन गयी है।
जानता हूँ 'जी' नही सकते, हमारे प्यार बिन तुम-
आपसी  तकरार  की आदत तुम्हारी बन गयी है।
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दिल  हमारा  रो  रहा है, अश्रु  तेरे बह  रहे क्यों।
होंठ हैं खामोश मेरे,  ये नयन कुछ कह रहे क्यों।
बाँटते  हो  दर्द  मेरा,  क्यों  मेरे  हमदर्द  बनकर-
ताप ये मेरे घुटन की, साथ  में तुम  सह रहे क्यों।।
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1 comment:

  1. बहुत सुन्दर। बधाई और शुभकामनाएं। शिवेंद्र जी।

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