राज्य - राजस्थान
शीर्षक - शिक्षक धर्म
मो. 9772663818
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बेशक अपना कर्म है शिक्षा ,
लेकिन धर्म निभाना है ।
आज राष्ट्र पर संकट है तो ,
इस से पार लगाना है ।
एक सैनिक जो सीमा पर है,
एक हमको अब बनना है।
वो दुश्मन से रोज लड़े है,
कुछ दिन हमको लड़ना है।
द्रोण,कृप और चाणक्य तक,
सबने धर्म निभाया है।
तब हम तुम कैसे पीछे हो
जब देश पर संकट छाया हो।
कोरोना से जंग है जारी ,
तो कुछ अपनी भी है बारी।
अपने निज हित, स्वार्थ सभी को,
छोड़ मिटानी ये महामारी ।
चाहे तो वेतन कट जाए या,
चाहे वेतन बंट जाए ।
पर अपने श्रम समर्पण से ये,
काले बादल छंट जाए ।
Nice sir ji
ReplyDeleteअद्भुत ,शिक्षकों को अभिप्रेरित करने वाली शानदार कविता ।।।
ReplyDeleteबहुत ही शानदार प्रस्तुति आपकी अद्भुत
ReplyDeleteवास्तव में आज के इस समय में कॉरोना जैसी महामारी को पराजित करने में शिक्षक का बहुत ही बड़ा योगदान रह रहा है बहुत ही शानदार रचना धन्यवाद
ReplyDeleteNice sir ji
ReplyDeleteबहुत ही शानदार रचना जी
ReplyDeleteबहूत शानदार रचना साहब
ReplyDeleteशानदार प्रस्तुति के लिये बधाई आदरणीय
ReplyDeleteShandaar Rachana
ReplyDeleteAti Sundar...
ReplyDeleteबहुत शानदार
ReplyDeleteबहुत हो शानदार रचना की है राव शाहब
ReplyDeleteAwesome sir
ReplyDeleteराष्ट्र के लिए शिक्षक की भूमिका को अभिव्यक्ति देने वाली गोविन्द सिंह राव जी की शानदार रचना। शुभकामनाये।
ReplyDeleteशानदार रचना राव जी
ReplyDeleteशानदार रचना राव जी
ReplyDeleteNice sir ji
ReplyDeleteBeautiful
ReplyDelete👌👌👌👌
ReplyDeleteबहुत ही शानदार रचना
ReplyDeleteउत्त्साहवर्धक
ReplyDeleteशिक्षक की भूमिका हमेशा देश के लिए किसी योद्धा से कम नहीं है ,
ReplyDeleteशिक्षक वर्ग किसी भी परिस्थिति में तैयार रहता हैं !