Monday, April 6, 2020

छत्तीसगढ़ से रश्मि विपिन अग्निहोत्री की रचना- आजाद पंछी

कवयित्री - रश्मि विपिन अग्निहोत्री
राज्य - छत्तीसगढ़
विषय - *आजाद पंछी* 

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आजाद पंछी सा व्यक्तित्व मेरा, 
और सारा जहाँ मेरा चमन है। 

पंछी बन उड़ती फिरूं हरदम, 
नीलगगन प्राप्य  मेरा स्वप्न है । 

जब दिये है कल्पनाओं के पंख, 
आखिर पंख है उड़ान भरने को । 

नाआजादी मेरी यूँ कैद करो तुम, 
झूठी शराफत से ऐ जहाँ वालों । 
 
बहुत आजमाया तकदीर ने मुझको, 
अब अग्नि में तपकर कठोर मन है । 

 देखो उम्मीद-ए-चिराग कम नही हैं, 
अब आँखें  मेरी अब नम नहीं हैं । 

ऐ जहांँ छोड़ दे  मुझे आजमाना, 
तुझ में अब इतनी दम नहीं हैं । 

 कब से बुतपरस्ती छोड़ दी हमने, 
हर ताबीर झूठी  तोड़ दी हमने । 

हौसला बुलंद हैं अटल इरादा है, 
" रश्मि " बात इतनी कम नहीं हैं।। 

✍रश्मि विपिन अग्निहोत्री
     केशकाल, जिला कोण्डा़गांव

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