राज्य - छत्तीसगढ़
विषय - *आजाद पंछी*
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आजाद पंछी सा व्यक्तित्व मेरा,
और सारा जहाँ मेरा चमन है।
पंछी बन उड़ती फिरूं हरदम,
नीलगगन प्राप्य मेरा स्वप्न है ।
जब दिये है कल्पनाओं के पंख,
आखिर पंख है उड़ान भरने को ।
नाआजादी मेरी यूँ कैद करो तुम,
झूठी शराफत से ऐ जहाँ वालों ।
बहुत आजमाया तकदीर ने मुझको,
अब अग्नि में तपकर कठोर मन है ।
देखो उम्मीद-ए-चिराग कम नही हैं,
अब आँखें मेरी अब नम नहीं हैं ।
ऐ जहांँ छोड़ दे मुझे आजमाना,
तुझ में अब इतनी दम नहीं हैं ।
कब से बुतपरस्ती छोड़ दी हमने,
हर ताबीर झूठी तोड़ दी हमने ।
हौसला बुलंद हैं अटल इरादा है,
" रश्मि " बात इतनी कम नहीं हैं।।
✍रश्मि विपिन अग्निहोत्री
केशकाल, जिला कोण्डा़गांव
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