राजस्थान
राम कथा1
8769764786
डगमग डगमग, चरण धर चलत,
जगमग जगमग, कर सकल जगत। 1
तन मन धन सब, त्यजत सुधि सकल,
निज सुत मुख लख, दशरथ विचल। 2
दधि मुख लपटन, पग धर अटपट,
दशरथहि सदन, तन रज लटपट। 3
निज जनक वचन, सुनत वनगमन,
धर तपस वसन, सह दुख अनगन। 4
कलकल छलछल, पितु नयन सजल।
स्मर गति पल पल, रघुकुल शतदल।5
सिय लखन सहित, वन वन भटकन,
दशमुख कपटत, पिय सिय हरण। 6
पिय सिय सिय कह, सिय पिय बिलखत,
मिलत विपिन मह, कपिपति हनुमत। 7
चलत दिशि दखन, कपि कटक सकल,
चह जलधि तरन, कपि निकर विकल।। 8
Nice lines bhaiya
ReplyDeleteभगवान श्री राम जी के जीवन पर आधारित अद्भुत सृजन
ReplyDeleteधन्यवाद सभी भाइयों का
ReplyDeleteबहुत ही सुंदर
ReplyDeleteबहुत ही सुंदर
ReplyDeleteआभार जी
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