राज्य -राजस्थान
. कविता का शीर्षक- बवंडर
सम्पर्क नम्बर-8764345001
एक सोच सभी में
होती है
निरंतर चिन्तन की
आँखो की पुतलियो
से मस्तिश्क तक
पहुंच जाती
अनवरत इतिहास के
पन्ने खुल जाते
पहले भी खुले होन्गे।
सिकन्दर से लेकर हिटलर तक
सभी की अन्दरुनी परत एक थी
चाहे इलियट का काव्य हो
चाहे शेक्स्पियर के सम्वाद
सबकी परते एक सी
वही दिमाग के अंधेरे में
सोच का सेलाब
अनवरत घुमता
हर एक के
शब्दों में
होता
है कल्पना मय
विचार का
बवंडर
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