Monday, April 20, 2020

दिल्ली से जोगिंदर कुमार की रचना- एक लौ जलानी है

जोगिंदर कुमार
दिल्ली 
एक लौ जलानी है 
8743858032

एक राह दिखानी है 
    एक लौ जलानी है 
ज़िन्दगी की इस मुश्किल घड़ी में 
    एक आस जगानी है 

छूट रही हर साँस में
     उम्मीद बनानी है 
हर  बेसहारा  की 
   अब भूख मिटानी है 

हर बुझते दिए को 
   नव लौ दिखानी है 
 निराशा की इस घड़ी में 
   उम्मीद बढ़ानी है 

उस लड़ते हुए जाबांज का 
    ढांढस बढ़ाना है 
उस सफ़ेद पोशाक को  
    नमन करना है  


उस हर पथराई आँख में 
   विशवास जगाना  है 
हम एक है, एक थे 
   पैगाम पहुँचाना है 

ठान लो की कोई ,निराश न होये
    इन्सां हो इन्सां का, एहसास तो होये 
बहुत जिया अपने लिए 
    कुछ दूसरो को दो 
मानवता का कर्ज 
     अब तो उतार दो 

जात-धरम की संकीर्णता से 
  खुद को बचा ले 
हर इन्सां, इन्सां है 
 बस इतना समझ ले 

इस मुश्किल घड़ी को भी
   हम पार करेंगे 
फिर से एक नए 
  नए हिंदुस्तान का निर्माण करेंगे 

होंसले बुलंद है 
   कोई छू ना पायेगा 
फिर से  मेरा हिन्दुस्तान 
  आगे  बढ़ता जायेगा
 
जोगिन्दर कुमार

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