श्रीमाधोपुर राजस्थान।
सम्पर्क 9351212400
कविता
शीर्षक:- मैं पुतला बेजान
बिना तुम्हारे दोस्तों
मैं पुतला बेजान ।
तुम पुतले के प्राण हो
तुम ही इसकी जान ।।
साथ तुम्हारे से मिला
मुझे मान सम्मान ।
साथ तुम्हारे रहने से
बढती है मेरी शान ।।
छोड ना देना तुम मुझको
जाने या अनजान ।
बिना तुम्हारे जी ना सकूंगा
तुम हो मेरी पहचान ।।
तुम हो मेरी पहचान ....
कुमार तनसुख
बहुत ही सुन्दर। यारी है ईमान मेरा यार मेरी जिंदगी।
ReplyDeleteबहुत खूब लिखा है आपने। सुन्दर रचना
ReplyDeleteअति सुन्दर
ReplyDeleteMujhe buhat Achi lgi aapki kavita very good
ReplyDeleteबहुत सुन्दर रचना
ReplyDeleteबहुत सुन्दर रचना
ReplyDeleteबहुत सुन्दर अभिव्यक्ति
ReplyDeleteअत्युत्तम👌
ReplyDeleteवाह जी आपके कवि ह्रदय की दाद देनी पड़ेगी।
ReplyDeleteबहुत सुंदर
ReplyDeleteबहुत सुंदर
ReplyDeleteशानदार भाईसाहब।
ReplyDeleteवाह वाह क्या बात है
ReplyDelete