शीर्षक-"माँ"
राज्य-पश्चिम बंगाल
भींगे चादर पर जो सोती है
बच्चों को आँचल में छिपाती है
स्वयं भूखे रह कर जो
बच्चे को खाना खिलाती है
वो औरत माँ कहलाती है
दुःख दर्द सभी वो सहती है
पर मुँह से आह न करती है
वो औरत माँ कहलाती है
सपने में भी जो बच्चे को
दुःखी ना देख सके
उसी के नींद जो सोती है
उसी के नींद जो जगती है
वो औरत माँ कहलाती है
देखती है राह स्कूल से
घर वापस लौट आने की
फिर मीठी पुचकारी देकर
जो आलिंगन में बांध लेती है
वो औरत माँ कहलाती है
झेल लेती है संकट सभी
बच्चे पर आँच न आने देती है
वो औरत माँ कहलाती है
"दीनेश" ऐसे माँ को कभी भूलना नहीं
उसके आँखों में आँसूं आने देना नहीं
भगवान का रूप वो होती है
वो औरत माँ कहलाती है
दिनेश चंद्र प्रसाद "दीनेश" कलकत्ता
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