राज्य -(झारखंड )रांची
शीर्षक-भाई
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*भाई*
ये जो भाई है
बहना के प्यार की कमाई है।
नखरे बहन के,
भाई ने ही बखूबी उठाई है।
आपस की लड़ाई झगड़े,
आपस के नोकझोंक,
बड़े भाई की रोक टोक
हैं उनके प्यार की परिभाषा,
यह प्यार ही है कुछ जुदा सा।
पिता की परछाई है भाई।
एक सच्चा दोस्त है भाई
बहना जो कभी रूठे,
उसे मनाता है भाई।
पापा के बाद
सारी जिम्मेदारियां उठाता है भाई।
नटखटता ,मधुरता ,
गंभीरता, चंचलता
इन सभी का समावेश है भाई।
बहनों के आँख का तारा है
उसका सहारा है।
प्यार एक दूसरे से करते है।
बिना कहे ही
सारी फरमाइशे पूरी करता है।
हंसी- मजाक, रूठना -मनाना
ये बचपन की अठखेलियाँ।
यही है इस रिश्ते की गहराईयां।
✍ डॉ अलका कुमारी
(झारखंड) रांची✍
बहुत ही सुन्दर रचना है ⚘⚘⚘⚘
ReplyDeleteGood
ReplyDeletevery Good
Great feeling
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