पता - पेंडरवानी , बालोद ,छ. ग.
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शीर्षक - मूँछ
मूँछ
शरीर के अंगों में ,
मूँछ है तो तू स्त्रीलिंग ( व्याकरण की दृष्टि से )
पर तेरे कारण ही पुरुषत्व हावी होती है स्त्रियों पर ,
शायद तेरे आने से ही हावी होती है पुरुष पर भी ,
साथ ही हावी होता है अहम ,
(जो तेरा प्रतीक है )
शोषण करने की ,
बात मनवाने की ,
यह कहनें की ,
कि परिवार में मैं ही बड़ा हूँ ,
मुखिया हूँ ,
मेरे बिना अधूरा है घर समाज - और न जाने कहाँ -कहाँ ?
सच ही है ,
पर यह भी सच है तेरे (मूँछ )होने न होने से
कुछ नही होता ,
दिलों में प्यार हो , परवाह हो ,
बच्चों की खिलखिलाहट में तेरी हँसी हो ,
बड़ो की दर्द में तेरी आह हो ,
तब तो तू पुरुषत्व की पहचान है और तेरा वर्चस्व ही है ,
नही तो कई घर भी पुरुष के बिना भी चलता है ,
और कुछ समाज भी ।
- शैलेन्द्र चेलक -
Nice line sir
ReplyDeleteImpressive sir
ReplyDeleteAppreciative sir ji
ReplyDeleteNice line sir
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