Wednesday, December 11, 2019

छत्तीसगढ़ से शैलेन्द्र चेलक की रचना- मूँछ

नाम - शैलेन्द्र चेलक
 पता - पेंडरवानी , बालोद ,छ. ग. 
सम्पर्क  -9098518976
 शीर्षक - मूँछ 

        मूँछ 
 शरीर के अंगों में ,
मूँछ है तो तू स्त्रीलिंग ( व्याकरण की दृष्टि से )
पर तेरे कारण ही पुरुषत्व हावी होती है स्त्रियों पर ,
शायद तेरे आने से ही हावी होती है पुरुष पर भी ,
साथ ही हावी होता है अहम ,
(जो तेरा प्रतीक है ) 
शोषण करने की ,
बात मनवाने की ,
यह कहनें की , 
कि परिवार में मैं ही बड़ा हूँ ,
 मुखिया हूँ ,
मेरे बिना अधूरा है घर समाज - और न जाने कहाँ -कहाँ ?
सच ही है ,
पर यह भी सच है तेरे (मूँछ )होने न होने से 
कुछ नही होता ,
दिलों में प्यार हो , परवाह हो ,
बच्चों की खिलखिलाहट में तेरी हँसी हो ,
बड़ो की दर्द में तेरी आह हो ,
तब तो तू पुरुषत्व की पहचान है और तेरा वर्चस्व ही है ,
नही तो कई घर भी पुरुष के बिना भी चलता है ,
और कुछ  समाज भी । 

      - शैलेन्द्र चेलक -

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