Thursday, November 7, 2019

छत्तीसगढ़ से फरूण कुमार यादव की रचना- मंजिल के करीब

कवि :- फरूण कुमार यादव
शीर्षक :- मंजिल के करीब
राज्य :- छत्तीसगढ़
संपर्क :- 6268201025
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     ...मंजिल के करीब...
हाँ हुजूर ! हम मंजिल के करीब हैं...
बरसों के सफर को
मेहनत के असर को
न कहना कोई नसीब है...
हाँ हुजूर ! हम मंजिल के करीब हैं...
कितने परीक्षाएँ दियें,
बुलंद हौसले लिए,
जटिल जो था,हसीन हमने किये
जमाना इसे हमारे तकदीर कहते हैं
कितने अजीब है...
हाँ हुजूर ! हम मंजिल के करीब हैं...
मन में उमंग है
प्रतीक्षा के दिन चंद है
लकीरों से जंग है
किस्मत खरीद ही लेंगे हम पसीने से
भले ही गरीब हैं...
हाँ हुजूर ! हम मंजिल के करीब हैं...
बरसों के सफर को
मेहनत के असर को
न कहना कोई नसीब है...
हाँ हुजूर ! हम मंजिल के करीब हैं...
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                 फरूण कुमार यादव
                 जाँजगीर-चाम्पा,छ.ग.

21 comments:

  1. बरसों के सफर को
    मेहनत के असर को
    न कहना कोई नसीब है...
    हाँ हुजूर ! हम मंजिल के करीब हैं..
    I Waiting "SEAT " Exam result....

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  2. मंजिल के करीब है
    Brilliant sir

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  3. सम्माननीय फरुण यादव जी..
    आपकी यह रचना बहुत ही विचारणीय और यथार्थ है...
    सभी की मंजिल को पाने के सफर में आयी कठिनाइयों को पंक्तियों में सजा दिया...
    सधन्यवाद..

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  4. Hausla rakho manjil ke karib hain.best kavita.

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  5. कर्मवाद की अद्वितीय प्रतिष्ठा...👌👌

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  6. हाँ हुजूर ! हम मंजिल के करीब हैं...
    बरसों के सफर को
    मेहनत के असर को
    न कहना कोई नसीब है...
    Very nice 👌👌

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  7. आपके ओजपूर्ण कविता आशा जीवित करती है..."मंजिल के करीब" 👌👌

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  10. बुलंद हौसलों से भरा प्रभावपूर्ण कविता, सर जी

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  11. मेरी यह कविता शिक्षक भर्ती की ओर इंगित कर रही है कि हम मंजिल के करीब हैं...

    शिक्षक भर्ती निर्विघ्न पूर्ण होगी। इसी अशेष शुभकामनाओं के साथ आप सभी भावी शिक्षकों सह प्रिय पाठकों को मेरा नतमस्तक...👏

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  12. बहुत ही सुन्दर कविता

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  13. कितने परीक्षाएँ दियें,
    बुलंद हौसले लिए,
    जटिल जो था,हसीन हमने किये
    जमाना इसे हमारे तकदीर कहते हैं
    कितने अजीब है...
    हाँ हुजूर ! हम मंजिल के करीब हैं...✍️👌👌👌👌

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  14. मेरी यह कविता उन सकल पथिक के चरणों में सादर स्पर्शित जो अपने मंजिल के करीब हैं...👏

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  15. बहुत ही सुंदर कविता है

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  16. बहुत अच्छी है

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