कवि :- फरूण कुमार यादव
शीर्षक :- मंजिल के करीब
राज्य :- छत्तीसगढ़
संपर्क :- 6268201025
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शीर्षक :- मंजिल के करीब
राज्य :- छत्तीसगढ़
संपर्क :- 6268201025
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...मंजिल के करीब...
हाँ हुजूर ! हम मंजिल के करीब हैं...
बरसों के सफर को
मेहनत के असर को
न कहना कोई नसीब है...
हाँ हुजूर ! हम मंजिल के करीब हैं...
बरसों के सफर को
मेहनत के असर को
न कहना कोई नसीब है...
हाँ हुजूर ! हम मंजिल के करीब हैं...
कितने परीक्षाएँ दियें,
बुलंद हौसले लिए,
जटिल जो था,हसीन हमने किये
जमाना इसे हमारे तकदीर कहते हैं
कितने अजीब है...
हाँ हुजूर ! हम मंजिल के करीब हैं...
बुलंद हौसले लिए,
जटिल जो था,हसीन हमने किये
जमाना इसे हमारे तकदीर कहते हैं
कितने अजीब है...
हाँ हुजूर ! हम मंजिल के करीब हैं...
मन में उमंग है
प्रतीक्षा के दिन चंद है
लकीरों से जंग है
किस्मत खरीद ही लेंगे हम पसीने से
भले ही गरीब हैं...
हाँ हुजूर ! हम मंजिल के करीब हैं...
प्रतीक्षा के दिन चंद है
लकीरों से जंग है
किस्मत खरीद ही लेंगे हम पसीने से
भले ही गरीब हैं...
हाँ हुजूर ! हम मंजिल के करीब हैं...
बरसों के सफर को
मेहनत के असर को
न कहना कोई नसीब है...
हाँ हुजूर ! हम मंजिल के करीब हैं...
मेहनत के असर को
न कहना कोई नसीब है...
हाँ हुजूर ! हम मंजिल के करीब हैं...
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फरूण कुमार यादव
जाँजगीर-चाम्पा,छ.ग.
जाँजगीर-चाम्पा,छ.ग.

बरसों के सफर को
ReplyDeleteमेहनत के असर को
न कहना कोई नसीब है...
हाँ हुजूर ! हम मंजिल के करीब हैं..
I Waiting "SEAT " Exam result....
मंजिल के करीब है
ReplyDeleteBrilliant sir
विचारणीय रचना
ReplyDeleteसम्माननीय फरुण यादव जी..
ReplyDeleteआपकी यह रचना बहुत ही विचारणीय और यथार्थ है...
सभी की मंजिल को पाने के सफर में आयी कठिनाइयों को पंक्तियों में सजा दिया...
सधन्यवाद..
Hausla rakho manjil ke karib hain.best kavita.
ReplyDeleteकर्मवाद की अद्वितीय प्रतिष्ठा...👌👌
ReplyDeleteहाँ हुजूर ! हम मंजिल के करीब हैं...
ReplyDeleteबरसों के सफर को
मेहनत के असर को
न कहना कोई नसीब है...
Very nice 👌👌
आपके ओजपूर्ण कविता आशा जीवित करती है..."मंजिल के करीब" 👌👌
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ReplyDeleteबुलंद हौसलों से भरा प्रभावपूर्ण कविता, सर जी
ReplyDeleteमेरी यह कविता शिक्षक भर्ती की ओर इंगित कर रही है कि हम मंजिल के करीब हैं...
ReplyDeleteशिक्षक भर्ती निर्विघ्न पूर्ण होगी। इसी अशेष शुभकामनाओं के साथ आप सभी भावी शिक्षकों सह प्रिय पाठकों को मेरा नतमस्तक...👏
बहुत ही सुन्दर कविता
ReplyDeleteकितने परीक्षाएँ दियें,
ReplyDeleteबुलंद हौसले लिए,
जटिल जो था,हसीन हमने किये
जमाना इसे हमारे तकदीर कहते हैं
कितने अजीब है...
हाँ हुजूर ! हम मंजिल के करीब हैं...✍️👌👌👌👌
मेरी यह कविता उन सकल पथिक के चरणों में सादर स्पर्शित जो अपने मंजिल के करीब हैं...👏
ReplyDeleteबहुत ही सुंदर कविता है
ReplyDeleteBahut hi sundar
ReplyDeleteNice line
ReplyDeleteVery nice
ReplyDeleteVery nice
ReplyDeleteबहुत अच्छी है
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