Thursday, November 7, 2019

दिल्ली से कवयित्री अंजली की रचना- जिंदगी की थकान

नाम -अंजली
विषय- जिंदगी की थकान
पता -दिल्ली गांधीनगर
मोबाइल -
जिंदगी की थकान
..................................
थक चुका हूं इस जिंदगी से
अब जाऊं तो कहां जाऊं।
कभी-कभी दिल करता है
सब कुछ छोड़ कर बैठ जाऊँ।
बहुत ही संघर्ष करना पड़ता है
ऐसे ही कहां जिंदगी चलता है।
सपनों को पूरा करने के लिए
अपनों को भी छोड़ना पड़ता है।
कभी-कभी दिल करता है
सब कुछ छोड़ कर बैठ जाऊं।
जिंदगी समझना इतना आसान नहीं
समझ गए तो यह बेकार भी नहीं
हर कोई अपना किरदार निभाता है
अपना अलग पहचान बनाता है।
अंत में समझ आ गया मुझे
सपनों को करो साकार।
बुरे वक्त को करो पार
तब समझ जाओगे
जिंदगी है कितना आसान।
अब दिल कर रहा है
फिर से नया दौड़ लगाऊँ।
कुछ नया सा कर जाऊं
जिंदगी को फिर से समझ पाऊँ
नाम- अंजली
पता -गांधीनगर

3 comments:

  1. Achha to mam Aap Kabiyatri kyo banana chahti h

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  2. Love this keep writing it's so motivating ma'am

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  3. भावपूर्ण कविता के लिए अनेकानेक बधाई...👏

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