कवयित्री - रश्मि अग्निहोत्री
शीर्षक - कोई लौटा दे मेरे बीते हुए दिन
राज्य - छत्तीसगढ़
सम्पर्क -
शीर्षक - कोई लौटा दे मेरे बीते हुए दिन
राज्य - छत्तीसगढ़
सम्पर्क -
कितने सुहाने दिन थे
बचपन के अपने ,
अब तो बीते जैसे
भूले से सपने।
बचपन के अपने ,
अब तो बीते जैसे
भूले से सपने।
परिंदे -सी उड़ान
क्या खेत क्या मकान,
फिरते थे गौरया बन
कभी खेत कभी खलिहान।
क्या खेत क्या मकान,
फिरते थे गौरया बन
कभी खेत कभी खलिहान।
ऊंची डाली की फुंनगी पर
रहता दिनभर बसेरा
न ज्ञान था ऊंच नीच का
न कुछ तेरा-मेरा।
रहता दिनभर बसेरा
न ज्ञान था ऊंच नीच का
न कुछ तेरा-मेरा।
न कोई दास न कोई स्वामी
बस सभी खेलते- खेला।
बस सभी खेलते- खेला।
रूठना मनाना और फिर
हिल - मिल जाना।
कितने सुहाने दिन थे
दिन बचपन के अपने
अब तो बीते जैसे सपने।
दिन बचपन के अपने
अब तो बीते जैसे सपने।
जाये चाहें सब कुछ छिन
कोई लौटा दे मेरे बीते हुए दिन,
कोई लौटा दे मेरे बीते हुए दिन।।
कोई लौटा दे मेरे बीते हुए दिन,
कोई लौटा दे मेरे बीते हुए दिन।।
✍️ *रश्मि*अग्निहोत्री*

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