Tuesday, November 26, 2019

बिहार से डॉ पूनम झा की रचना- सच्चाई

डॉ पूनम झा
दरभंगा,बिहार
सम्पर्क --
विधा - कविता
शीर्षक --सच्चाई
         सच्चाई
************************
ज़िन्दगी एक सच्चाई है,
उसे छिपाओगे कबतक,
ज़ान तो एक दिन जाएगी,
उसे बचाओगे कबतक,
क्या मिलेगा तुमको,
दिल किसी का तोड़ कर,
छीनकर खुशियाँ किसी की
मुस्कुराओगे कबतक,
जरा दिलों अपने झाँककर
तो   देखो,घोट कर गला शराफ़त
का सुख पाओगे कबतक,
बेचते हो बेटों को शादी
के  नाम पर,
कहो बोली बेटे की यूँ
लगाओगे कबतक,
मिले नोट मुँह माँगे चिहे
लड़की  जैसी हो,
हाथों में दुल्हन के यूँ मेंहदी,
लगाओगे कबतक,
लगता है ज़नाजा जा रहा हो
   बेज़ान लाश का,
दुल्हन की ऐसु डोलियाँ,
उठाओगे कबतक,
बेटी अभी तुम्हारी भी कंवारी
    है याद रहे,
औरों की बेटियाँ को यूँ
रुलाओगे कबतक,
तुम्हारी बेटी को भी
अगर कोई सताने लगे,
जरि सोचो फिर तुम,
आँसू बहाओगे कबतक,
इसलिए करो दहेज से तौबा।
इस आग से आखिर खुद को
बचाओगे कबतक।
डॉ पूनम झा
दरभंगा, बिहार

11 comments:

  1. दहेज प्रथा के विरोध में समाज को जागरूक करने हेतु कवयित्री पूनम झा जी को अनेकानेक बधाई...🙏💐

    ReplyDelete
  2. सार्थक कविता....

    ReplyDelete
  3. बहुत ही अच्छी कविता... पूनम झा जी✍️

    ReplyDelete
  4. बहुत ही सुन्दर और सार्थक कविता

    ReplyDelete
  5. This comment has been removed by the author.

    ReplyDelete
  6. आखिर कब-तक...?
    👌👌👌👌👌👌👌

    ReplyDelete

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...