गार्गी सिंह
घड़ी औरत
महाराष्ट्र
घड़ी औरत
महाराष्ट्र
अपनी पहचान कमाने
घर से निकलती वो
'मैं भी कर सकती हूँ'
हर वक़्त सोचती वो
कभी घर, कभी ऑफ़िस
घड़ी की सूईयों पर टिकी वो
अपने सपनों की कसौटी पर
चकरगिन्नी सी घूमती वो
उसमें भी जज़्बात हैं
कह जाती अनकही वो
तेज़... और तेज़ बढ़ती
मुंबई लोकल सी दौड़ती वो
अपनों की ख़ातिर हरदम
अपनी ख़ुशियाँ समेटती वो
ओ स्त्री! तू प्रेरणा है!
सुनकर, बस मुस्कराती वो!
घर से निकलती वो
'मैं भी कर सकती हूँ'
हर वक़्त सोचती वो
कभी घर, कभी ऑफ़िस
घड़ी की सूईयों पर टिकी वो
अपने सपनों की कसौटी पर
चकरगिन्नी सी घूमती वो
उसमें भी जज़्बात हैं
कह जाती अनकही वो
तेज़... और तेज़ बढ़ती
मुंबई लोकल सी दौड़ती वो
अपनों की ख़ातिर हरदम
अपनी ख़ुशियाँ समेटती वो
ओ स्त्री! तू प्रेरणा है!
सुनकर, बस मुस्कराती वो!
गार्गी सिंह

Superbb maam
ReplyDeleteBeutifull
ReplyDeleteNice one 👌👌👌
ReplyDeleteBahot hi umda
ReplyDeleteBhut sunder
ReplyDeleteBahut hi badhiya Gargi keep it up
ReplyDeleteBahut hi sunder👌👌
ReplyDeleteSabhi kaam karnewali Mahilaon ke liye...bahut hi sundar
ReplyDeleteAmazing.....
ReplyDeleteBahut Sunder.👍
ReplyDeleteAwesome
ReplyDeleteBehtareen..👌👌
ReplyDeleteBehtareen...👌
ReplyDeleteAwesome lines ☺☺
ReplyDelete👌👌👌👌👌line
ReplyDeleteBahut hi sundar rachana
ReplyDeletenice
ReplyDeleteActually...really awesome
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