रचनाकार सूर्य प्रकाश पाटिल
जिला बेमेतरा
विधा छंद मुक्त कविता
विषय श्रृंगार
शीर्षक पति पत्नी
पति पत्नी
पत्नी की श्रृंगार पति है,
पति की श्रृंगार पत्नी।
दोनों एक दूजे बिन अधूरे,
यही प्रेम की पाती।।
पत्नी श्रृंगार करती हैं,
अपने पति को खुश रखने की खातिर।
कई प्रकार के पकवान खिलाती,
घर परिवार की खुशहाली की खातिर।।
पत्नी जब श्रृंगार करे तो,
खुश हो जाते पति।
सारे घर का ख्याल वह रखती,
अपने पतिव्रत धर्म की खातिर।
गृहस्थ रूपी वाहन के,
पति पत्नी हैं पहिए।
दोनों सामंजस्य से चलते तो,
सुखमय होता हैं जीवन।।
सूर्य प्रकाश पाटिल
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