स्थान-खरसिया
जिला-रायगढ़
शीर्षक-मजदूर
विधा-कविता
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मजदूर
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घाम पियास म बुता करे बर,
हावय ग मजबूर।
मेहनत कस बड़ा काम करैया,
दुनिया के मजदूर।।
मेहनत करके पेट पालथे,
अउ परिवार चलाथे।
थप-थप थिपे मुड़ी ले पसीना,
त दू पैसा ओ हर पाथे।।
कड़ -कड़ ठंडा पड़त रइथे,
अउ तीपत रइथे घाम।
दिल से करथे कठिन परिश्रम,
ओला कहां आराम।।
पेट भर खाना, तन भर ओनहा,
सिर बर छइंहा चाही।
हपट-हपट के बुता करके,
ठोमहा भर रासन पाही।।
दुनिया म विकास के खातिर,
जिनगानी होम करे।
मेहनत के बलबूता ले,
लोहा, पथरा ल मोम करे।।
सड़क बांध अउ बिल्डिंग, ल,
अपन हाथ म सिरझाथे,।
कारखाना म जबर बुता करके,
तभो ले पेट भर नइ खाथे।।
तोर भरोसा सबो काम होथे,
हमन ल बड़ा गुरुर।
मेहनतकस बड़ा काम करैया,
दुनिया के मजदूर।
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गुलाब सिंह कंवर"गुलाब"
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