Wednesday, June 3, 2020

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ से गुलाब सिंह कंवर "गुलाब" की रचना- अहंकार

रचना कार -गुलाब सिंह कंवर "गुलाब"
स्थान-खरसिया
जिला-रायगढ़
शीर्षक "-मानुस तन पाके तैं काबर इतराय "
विधा-गीत
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मानुस तन पाके तैं काबर इतराय 
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मनखे हर तो  हीरा  जनम ये,
गियान   बुध  तोर  तन म गा।
लोभ, घमंड ईरसा खा डारिस,
आगी लगे  हे तोर  मन म गा।।
 मुख म  राम  बगल  म  छुरी,
 तैं,  अबिरथा   जनम  गँवाय...।।


सत  धरम  ल छोड़ के भाई,
तैं  करथस दुनिया  दारी गा,।
मनखे ल मनखे नाच नचावे,
बरकस  हर  बने मदारी गा।।
अइसन तोर जिनगानी बीतय,
हरि  सुमिरन  तैं हर  भुलाय..।।


जेन रद्दा  म झन  जा  कहे ले,
उही रद्दा म तैं हर जाथस जी।
कहे  बोले  ल  नइ  मानस तैं,
खूँटा  म  जा  हपचाथस  जी।।
अब्बर-जब्बरआज के मनखे,
 मुड़   धरे   करम  ल  ठठाय..।।


धन दोगानी मिले हवय तोला ,
काबर  तैं  हर  बौराथास  गा ।
अब्बड़ घमंड  हो जाथे तोला,
धन बल म उधम मचाथस गा।
आही  अइसन  समे  रे  ,संगी,
कछु  काम  कोनो नइ  आय..।।


माया मोह म  फँसे हे मनखे,
मोर-मोर तैंहर कहिथस  गा।
तोर-मोर घलो काम नइआवे,
काकर भरोसा म रहिथस गा।।
सुंदर काया तोर  भरे जवानी,
सबो  माटी म गा मिल  जाय..।।
||||||गुलाब सिंह कंवर गुलाब
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