राज्य: छत्तीसगढ़ ।
जिला: रायपुर ।
विषय: वतन ।
शीर्षक: वतन ।
विधा : छंद-मुक्त कविता ।
मोबाइल:6264189643 ।
वतन--
मेरे पूर्वजों का जहां है बसेरा--
वही धरती है, वतन मेरा ।
बचपन बीता, माटी थी माँ--
जीवन तारन का बना वो ठेरा,
वही धरा की गंध बना वतन मेरा ।
भूमंडल की धरा का हिस्सा मेरा--
भारत देश है प्यारा वतन हमारा,
अनेकानेक बसती, जहाँ संस्कृति,
ऐसा प्यारा-सा वतन है मेरा ।
मेरे वतन की प्यारी है पहचान--
नतमस्तक करता है अडिग हिमालय,
पाँव पखारे जलनिधि हिंद महासागर,
प्रकृति का अनुपम मिलता भंडार ।
विजयी विश्व तिरंगा झण्डा है प्यारा--
अविरल पावन नदियों की बहे धारा,
तटों पर हैं बसे पवित्र धाम का संसारा,
प्यार लुटाता,सद्भाव का वतन हमारा ।
आओ अपने वतन की शान में--
इसके चहुँमुखी विकास में,
ज्ञान-विज्ञान, शिक्षा का दीप जलायें,
इसकी अखंडता में मर-मिट जायें ।
"""स्वरचित प्रस्तुति ""12/8/24
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