Wednesday, August 14, 2024

रायपुर से हिम्मत सिंह अरमो की रचना- बँटवारे का दर्द

कवि: हिम्मत सिंह अरमो ।
राज्य: छत्तीसगढ़ ।
जिला: रायपुर  ।
विषय: विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस  ।
शीर्षक: बँटवारे का दर्द  ।
विधा: छंद-मुक्त कविता ।
मोबाइल: 6264189643 ।
दिनांक: 14/ 08 /2024
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   -।। बँटवारे का दर्द  ।।-
आजादी दिलाने कितने हुए कुरबाँ---
अंग्रेज़ हुकुमत की  हुई थी बिदाई ,
खुशनुमा-सा लगा  था वो दिन  ,
15 अगस्त, 1947 की थी वो तारीख़।

बिना भेदभाव, देश की आजादी में--
हरेक वर्गों, कस्बों से लेकर शहरों तक,
किशोर, युवा, महिला-पुरुष व बुजुर्ग, 
सबके त्याग, बलिदानी की है वेदी  ।

उस दर्द भरे पलों की विभीषिका--
जब देश का आपसी  बँटवारा हुआ,
अपनों का अपने से गमगीन जुदाई, 
था बहुत,धरा से बिछुड़ने का गम ।

अजीब सा दिखता था वो मंज़र--
हिन्दुओं-मुसलमानों,भारत-पाकिस्तान
इस शब्द की व्यथा की मार्मिक धारा, 
कलुष सी रातें, हैवानियत मातम डेरा।

जबर्दस्ती बेदख़ली होने का सदमा--
जीते-जी मुर्दा-सा हुआ था शरीर, 
जमीं का बँटवारा, भावनाएं थीं मरी,
कैसे कहें,कैसे लिखें, दर्दनाक कहानी।

परिवार,रिश्तों, माटी की गंध से--
अनायास छूटती,लुटती, बिखेरते हश्र,
मरघट-सा बना,चेहरे के हाव-भाव ,
मजहबी बँटवारा,बनीं खून की होली ।

मैं दुखित मन से यही कहूँगा---
बँटवारा- जमीं का हो या रिश्तेदारों से,
जब भी,,जिसका भी हो,कोई कारण, 
जीते-जी व्यक्ति मुर्दा बन ही जाता है ।
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स्वरचित मौलिक प्रस्तुति ***
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