Monday, August 12, 2024

कोरबा से कृष्णा देवी कारकेल की रचना- वतन

नाम-कृण्णा देवी कारकेल
पता-डीएम.-89ओमपुर
रजगामार,कोरबा(छ.ग)
मो.नं.-9399432577

         *वतन*
वतन वतन वतन ,ये प्यारा वतन।
तेरा-मेरा मेरा-तेरा ,हम सबका वतन ।।2।।

फूल खिल खिलाए, कलियाँ मुस्काएं ।
भँवरे गुनगुनाए , तितलियाँ भी गाएं।। 

सागर संगीत छेड़े ,
कुछ होले-होले बोले ।
कोयल की मीठी बोली, कानों में मिश्री घोले।।2।।

नादियो की ये धारा,
सूर से सूर मिलाएं।
सब मिलके देखो आए, एक साथ गाएं।। वतन... 

वतन ये मेरा , फूलों की है बगिया।
क्यारी इसकी जैसे ,गाँवो की है गलियाँ।।

बेला गुलाब चम्पा ,
फूलों की डलियाँ। 
बगियाँ देखो महके,  
चले पुरवइयाँ।।2।।

इसमें राम की कथा, 
यहाँ कृष्ण कन्हैया। 
 शहीदों की कुर्बानी, मजदूर किसान भैया।।वतन.......

यहाँ सब मिलके रहे ,
रहे चैन-अमन ।
भारत की ये धरती, 
है प्यार का चमन।।2।। वतन........।।2।।
....................।।.................

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