जिला: रायपुर ।
राज्य: छत्तीसगढ़ ।
विषय: कमरछट ।
शीर्षक: कमरछट बनाम हलषष्ठी पर्व।
विधा: छंद-मुक्त कविता ।
मोबाइल: 6264189643 ।
दिनांक: 24/8/24 ,शनिवार ।
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** कमरछट बनाम हलषष्ठी पर्व **
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कमरछट व्रत महिलायें ही रखतीं हैं--
भाद्रपद कृष्णपक्ष षष्ठीतिथि को होता,
बलरामजी का जन्मदिन पर्व भी होता,
इस दिन छठ माता की पूजा करते हैं ।
संतानों की सुरक्षा,समृद्धि हेतु होता--
व्रत में महुआ डाली की दातून,महुआ
पत्ते का पत्तरी-दोनॉ ,महुआ का फूल,
कांसी घास डाल,पलास,झरबेरी होती।
पूजा के लिए महिलायें व्रत रखतीं हैं--
स्नान कर,आँगन में झरबेरी,पलास व
कांसी की टहनी लगाकर पूजा करतीं,
छठी माता चित्र के सामने, उस पर ,
सात अनाजों का मेल" सतनजा" और
दही-तिन्नी के चाँवल भोग लगातीं हैं,
फिर बैठकर हलषष्ठी की कथा सुनते।
व्रत में हल की पूजा करते हैं और--
बिना हल जोते पसहर का चाँवल का,
भोजन, छ: प्रकार की भाजी, महुआ का फूल भुना,लाई,भैंस के दूध-दही का सेवन, फलों का सेवन वर्जित है ।
पूजा के लिए एक चौकी-पाटै पर --
गौरी-गणेश, कलश रखकर, हलषष्ठी-
देवी मूर्ति की पूजा मिलकर करतीं ,
खिलौने भंवरा,बाटी भी रखते हैं ।
इस व्रत में तामसिक भोज्य वर्जित है-
पर, सब्जी-आलू ,दही आलू ,जीरा- आलू, आलू टमाटर, आलू पकौड़ी,
कद्दू की सब्जी, हलवा,खट्टे में बना,
शकरकंदी हलवा, टिक्की खाते हैं ।
कमरछट को हलषष्ठी, हरछठ भी--
कहीं-कहीं कहते,कुछ राज्यों में ही,
महिलायें इसे उत्सुकता से हैं मनाते,
अपने परंपराओं का निर्वाह करते ।
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स्वरचित-प्रस्तुति,बोरियकला,छ.ग.।
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