ग्राम :-- कुकरेल ( सलोनी )
जिला :-- धमतरी ( छ. ग. )
विषय :-- कमरछठ
विधा :-- कविता ( छंदमुक्त )
दिनांक :-- 24 / 8 / 2024
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भादो महिना पाख आँधियारी,
छठ के परब मनाथे जी।
जम्मो नारी मन व्रत रखथे,
उही कमरछठ कहाथे जी।
हलषष्ठी जेखर नाम हवे गा,
हल ले दूरी बनाथे जी।
जेन जगह में हल नइ चले,
उही जगह के जेवन खाथे जी।
दूध दही ला भंइस के वोमन,
उपयोग मा लाथे जी।
पान सुपारी धजा अउ नारियल,
सगरी खोद के चढ़ाथे जी।
भजन कीर्तन घलो होथे,
कहानी घलो सुनाथे जी।
अपन लइका के सुख के खातिर,
शिव भोला ल मनाथे जी।
छः प्रकार के भाजी के साग ल,
पसहर के भात संग खाथे जी।
कुकुर बिलाई अउ गाय ल खाना,
वोमन पहिली ख़िलाथे जी।
बड़ महिमा हे कमरछठ व्रत के,
पूरा देश येला मनाथे जी।
येखर दु दिन के बाद में "दीप"
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी आथे जी।
कुलदीप सिन्हा "दीप"
कुकरेल ( सलोनी ) धमतरी
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