जिला -दुर्ग
विषय- कमरछठ
विधा- कविता(छंदमुक्त)
रखें हवन लईका बर कमरछठ उपास ।
बने-बने रहें और करें जीवन में खास ।।
खम्हार के पतरी में खाबो पसहर के भात।
भैसी के घी में राँधबो भाजी के छै जात।।
सगरी में जल डाल के पूजा करबो आज,
सिंदूर माँग सजे रहे यही हे हमर लाज ।।
बाँट के मया संग में लाई महुआ के परसाद।
बेटी ल पोता मार के, देबो आसिरबाद।।
भगवान सुनही हमर अइसने हे बिस्वास।
गोदी हरा-भरा रहे माता के यही आस ।।
सदा सुहागन रहें और बिंदी चमके माथ ।
घर अँगना म हमर खुशहाली रखे नाथ ।।
अनुरमा शुक्ला
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