जिला, राजनांदगांव
राज्य, छःगः,
विषय, संगम,
शीर्षक, संगम,
विधा कविता,
मोबाइल नंबर, 9165674670
बिना संगम दुनिया निरर्थक
करो लाखों यतन
बिना संगम धरती माता
न करे पुत्रों की जतन
संगम होने पर ही दुनिया में
आए नई पहल
बिना संगम के जीवन
लगता है जैसे गरल
खुशी का संगम मिल जाए तो
होते हैं लोग निर्मल
धरती से आसमान मिले तो
होता है शीतल
शीतलता की छांव में देती
सूर्य की गर्माहट
तब जाकर द्वार खुलता
सुबह होने की आहट
सुंदर मूर्ति बनाने को
ठोकरो का करे बसावट
जो ठोकर खाए दुनिया में
उसी का बढें सजावट
जब-जब आगे बढ़ना है तो
गुरुवर का करो नित संगम
असफलता से मायूसी होने पर
धरती का करें भ्रमण
धरती माता गोल है बिना भेद
दिये आंचल
हिंदू मुस्लिम सिख इसाई
सभी ने पाई आंचल
संगम समाज की रचना
और यही अवधारणा सदा रहे दुनिया में संगम
बस यही अवधारणा
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