जिला,मुंगेली,
राज्य, छःगः,
विषय, संगम,
शीर्षक, संगम,
विधा कविता,
मोबाइल नंबर, 9981830087,
आत्मा और परमात्मा का संगम,सार जीवन,
एक दूसरे के हैं पूरक
मुनि,संत,समझें एकैक।।
शरीर नश्वर,आत्मा है,
शाश्वत यह जो समझे,
वह बेकार मोह,त्याग,
परमात्मा संगम चाहता।।
नैतिक, आध्यात्मिक,
चिंतन, मनन करता है,
ना व्यर्थ आलाप करता
प्रभु पग में स्थान चाहता।।
सच्चिदानंद स्वरूप पर
ध्यान, धारण वह करता
धीरे धीरे वह शिखर,
के पास लेता, संगम भी
आत्मा, परमात्मा संगम हो जाता।।
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