जिला,राजनांदगांव
राज्य, छःगः,
विषय, लोकमान्य तिलक,
शीर्षक, लोकमान्य तिलक,
विधा कविता,
मोबाइल नंबर 9165674670
लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक
बाल गंगाधर तिलक
उस तिलक की तरह है
जो माताओ की मांग में सज कर संरक्षण प्रदान करता है
तिलक जब किसी के माथे में लग जाए
तो वह चंदन बनकर
विषधर् नागों के बीच रहकर भी सुगंध महकाता है
तिलक माथे की बिंदी बनकर
एक नए श्रृंगार को जन्म देता है जिसके जन्म उत्सव के आनंद में लोग अपने आप में आनंदित होकर
नए सपनों और कल्पनाओं को पूरा करते हैं
जिस प्रकार से बाल गंगाधर तिलक
स्वतंत्रता मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और इसे मैं लेकर रहूंगा
इसे प्राप्त करने के लिए अंग्रेजों के सामने नहीं झुकूंगा
चाहे सूली पर चढ़ा दे मैं लड़ता हूं और लड़ता रहूंगा
समाचार पत्र केसरी और मराठा की तरह औजार बनूगां
विषैला सांपों के निगरानी में रहकर
गीता रहस्य की सुगंध जन जन तक फैलाऊंगा
जिस सुगंध से पूरा भारत सुगंधमय में होकर
सन 1947 में स्वतंत्र भारत का महकता हुआ तिरंगा लहराया है
ऐसे महानायक आज जन जन के दिलो में छाया है
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