जिला,मुंगेली,
राज्य, छःगः,
विषय, आस्था,
शीर्षक, आस्था,
विधा कविता,
मोबाइल नंबर, 9981830087,
आस्था में बल है महान
जिससे काम है आसान
मानों तो पाषाण में राम
जो की हैं मर्यादापुरुषोत्तम।।
पाप,ताप करते विनाश
साधु-संत,के हितैषी,
धर्म-परायण के सखा,
अधर्मीऔं के संहारक।।
आम जनमानस के राम
पतितपावन,सौम्य,राम
राम कहो या है श्याम
जगत के रखरखाव,काम।।
हमारा आस्था,नित्यनव
चिर पूरातन,के मानव,
सत्य से कलि,आस्था,
है प्रचलित,बलवान।।
आस्था में महती शक्ति,
है विद्यमान,चले रीति,
यह संसारिक बंधन भी
आस्था का अंश समान।।
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