जिला: रायपुर ।
राज्य: छत्तीसगढ़ ।
विषय: आस्था ।
विधा: छंद-मुक्त कविता ।
मोबाइल: 6264189643 ।
दिनांक, : 27/8/24,मंगलवार ।
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=: आस्था :=
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पाषण को हम भगवान हैं मानते--
आस्था में हम इन्हें पूजा करते ।
आस्था में हम सब व्रत हैं रखते--
ईश वंदना व अर्चना भी करते ।
मंदिर,मस्जिद,गिरजाघर व गुरूद्वारा--
सभी मानव आस्था के केन्द्र सारा ।
संतों,गुरूओं व महात्माओं पर--
आस्था रखे,उनका प्रताप मिले ।
प्रकृति व परम शक्ति पर रखे आस्था--
मरते दम तक,जीवनदायी शक्ति पाता।
माता-पिता व गुरूदेव पर आस्था--
श्रध्दा,प्रेम, सेवाभाव का पाठ पढ़ाते ।
नास्तिक का परमात्मा पर आस्था नहीं
फिर भी उनका आशीर्वाद बना रहता ।
आस्था से उपजे सद्कर्म भावना --
रखे जो नियंत्रण,सदा बुरे कर्मों से ।
भूमि,गगन,वायु,अग्नि और नीर --
आस्था में मिलकर बनते भगवान् ।
अक्सर बुजुर्गों से सुना है--
आस्था पर, टिका हुआ है संसार ।
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मौलिक रचना,बोरियकला,रायपुर ।
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