जिला,मुंगेली,
राज्य, छःगः,
विषय, वतन,,
शीर्षक, वतन,,
विधा कविता,
मोबाइल नंबर, 9981830087,
मेरा भारतवर्ष मेरा वतन,
सारा जगत में है चमन,
कितने आऐ,गऐ,विदेशी,
पर बाल बांका असंभव,भास।।
मेरा भारतवर्ष,मेरा वतन,
सारा जगत में जैसे चमन
कितने गऐ,आऐ,विदेशी,
पर तोड़ना नामुमकिन।।
डच,पर्तुगल फिर गोरा,
ड़ंक मारने,की कौशिश,
पर नापाक इरादे,धराशाई
1947,15,अगस्त,आजादी।।
स्वतन्त्रता दिवस है पावन,
पुरे देश मनाता,जश्न,धन,
हुआ नारी सशक्तिकरण,
नर संग कदमतल करे मानी।।
नभ,जल,थल में है सुमार
उसका हौसलाअफजाई,
करना जन,अपना धरम,
वतन के लिए चाहे कुर्बान।।
तिरंगा हमारा वतन,झंड़ा,
तिन रंग में लहराता,गगन
शान्ति,हरेली,प्रगति लिए,
वतन का बयां,शानो-शौकत।।
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