जिला - कोरबा
राज्य - छत्तीसगढ़
विषय - प्रतिशोध
विधा - कविता
दिनांक-29/07/2024
संपर्क - 9399432577
*प्रतिशोध*
मुझे लेना है प्रतिशोध , स्वयं अपने आप से। लेना है मुझे प्रतिशोध , अपने संकीर्ण व्यवहार से ।।
मुझे लेना है प्रतिशोध , अपने गुस्सेल दुर्व्यवहार से।
लेना है मुझे प्रतिशोध , मन में पाले उम्मीदो से।।
समाज में व्याप्त बुराइयों से , भ्रष्टाचार अत्याचारों से।
सामाजिक कुरीतियों से , लेना है हमें प्रतिशोध।।
लड़के-लड़कियों में भेद कर , वअनुचित व्यवहारों से ।
इनके बनाए अलग-अलग मापदण्डों से , लेना है हमें प्रतिशोध।।
भ्रष्ट नेता के चापलूसों से , बुरी नजर रखने वालों से ।
बहु बहन बेटी के बलात्कारियों से , हमें लेना है प्रतिशोध।।
देश में घुसपैठ कराने वाले , गद्दार घुसपैठियों से ।
देश में हमला कराने वाले आतंकवादियों से, हमें लेना है प्रतिशोध ।।
देश में धर्म-जाति के नाम पर ,दंगा करने वाले दलालों से ।
सामाजिक उन्माद पैदा करने वाले से , लेना है हमें प्रतिशोध।।2।।
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