ब्लॉक--आरंग
जिला --रायपुर
राज्य --छत्तीसगढ़
विषय- कविता
शीर्षक - अभिलाषा
विधा--छंदमुक्त
मो.-९७५३१६४८८५
दिनांक -13जुलाई
*सम्मान सृष्टि की अभिलाषा*
वह लड़की बड़ी सयानी थी
घर से सज-धज कर जब निकलती थी
हाथ में ग्रंथ ज्ञान की देवी थी
मेरी बेटी कुल की मर्यादा बन निकलती थी।।१।।
सम्मान सृष्टि की अभिलाषा वह लड़की मेरी बिटिया थी।।
परिधान हरी माथे में छोटी सी बिंदिया थी
खुले जुल्फें वृक्षों की छांव थी
आसमान की चादर पूरे बांहें फैलाये देखती थी
कमर की लचकियाँ हिरणी सी चाल थी।।२।।
सम्मान सृष्टि की अभिलाषा वह लड़की मेरी बिटिया थी।।
लबो पे रक्त वर्ण की लालीमा थी
कमरबंद पूरे शरीर को बांध जकड़ी थी
लाखों दिलों में वह राज करती थी
प्रकृति की सुनहरी लिबास आभा जड़ी थी।।३।।
सम्मान सृष्टि की अभिलाषा वह लड़की मेरी बिटिया थी।।
जन्नत की अप्सरा भी देख मानो जलती थी
हजारों दीवानों की दीवानी थी
सड़कें विरान होकर पायल ध्वनि सुनती थी
विरान में भी कोलाहल सी थी।।४।।
सम्मान सृष्टि की अभिलाषा वह लड़की मेरी बिटिया थी।।
जब से देखा जमाना कहती परी थी
कौन बताये उनको वह तो हीरे-मोती की जड़ी थी
हाथों में कंगन पैर में पैजन पहनी थी
खुब सुन्दर लग रही वह तो हुस्न की मल्लिका थी।।५।।
सम्मान सृष्टि की अभिलाषा वह लड़की मेरी बिटिया थी।।
सुन्दरता की वह प्रतिमूर्ति थी
दिखने में लगती साक्षात वह तो देवी थी
सोलह श्रृंगार से सुशोभित थी
सच में वह तो इस धरा की सुन्दरी थी।।६।।
सम्मान सृष्टि की अभिलाषा वह लड़की मेरी बिटिया थी।।
न चाहते देखता हर निगाहें थी
ईश्वर की रचना भी अद्भुत चमत्कारी थी
देखा नयन मुखमण्डल प्यारी थी
बुझे दीपक में प्रकाश पुंज की किरणें थी।।७।।
सम्मान सृष्टि की अभिलाषा वह लड़की मेरी बिटिया थी।।
हर किसी के दिले राज करती थी
कोमल पुष्प की पंखुड़ी लगती थी
आवाम में गुजरना इत्र की सुगंधा थी
हर किसी के मन की यह कल्पना थी।।८।।
सम्मान सृष्टि की अभिलाषा वह लड़की मेरी बिटिया थी।।
सादगी और सुशीलता की धनी थी
आधुनिकता को त्याग संस्कृति की महारानी थी
भारतीय होने की सच में गरब थी
मेरी संस्कारीक भारत माता की बिटिया रानी थी।।९।।
सम्मान सृष्टि की अभिलाषा वह लड़की मेरी बिटिया थी।।
हरमन आह्वान करता सभी की वह बेटी थी
मेरी बिटिया सच्ची भारत की अभिमान थी
मान करों हर बेटी की समझो अपनी बेटी थी
सम्मान सृष्टि की अभिलाषा हर बेटी मेरी थी।।१०।।
सम्मान सृष्टि की अभिलाषा वह लड़की मेरी बिटिया थी।।
रचनाकार/कलमकार/साहित्यकार
हरमन कुमार बघेल
व्याख्याता
आरंग - रायपुर
छत्तीसगढ़
9753164885
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