जिला,मुंगेली,
राज्य, छःगः,
विषय, आशियाना,,
शीर्षक, आशियाना,,
विधा कविता,
मोबाइल नंबर, 9981830087,
मजदूर का आशियाना,
मूषलाधार वारिश,आफत
छत का हुआ ढ़ह जाना,
वद्किश्मती उसकी दुखद।।
मुद्दतों बाद बना उसका,
प्यारा,छोटा आशियाना,
का यूं आंख,आगे तबाही
दिल हुआ दुखी,वेहिसाब।।
मजदूर का मजबूरी,बेहद,
गंभीर,गौरतलब,फरियाद
पर सुनते तक गमगीन,
काश कि बच जाता,आशियाना।।
चाहे बड़ा हो या हो छोटा
टुटने की टीस,दिल टूटा,
रहमत हो उस गरीब पर,
न टूटने दो उसका आशियाना।।
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