Tuesday, July 2, 2024

कोरबा से कृष्णा देवी कारकेल की रचना- सरताज

कवयित्री - कृष्णा देवी कारकेल
जिला - कोरबा 
राज्य - छत्तीसगढ़
विषय - सरताज
विधा - कविता
दिनांक-01/07/2024
संपर्क - 9399432577 
         
                   सरताज
सबके सरताज ,वह ऊपर वाला है, जो सबका रखवाला है। उनके बिना ना कुछ, काज होने वाला है ,वह बड़ा मतवाला है ।।

मात-पिता ही ,होते हैं सरताज, बात सुनो मेरी आज।
बिगड़ने न दे, कभी ये हमारे कल-आज,इनके बदौलत हैं हम आज ।।

भले हो गया है अपवाद, पत्नी के जी ,पति होते हैं सरताज ।
अगर पति है, शाहजहाँ तो ,पत्नी है जी मुमताज।। 

मजदूर के लिए, मालिक है जी सरताज ,मिले मजदूरी तो जीवन है खास। 
अगर है मालिक, भ्रष्टाचारी धोखेबाज ,तो बिखरेंगे जैसे पत्ते ताश।।
 
जैसे धरती के लिए, बादल है खास ,बूढ़े मात-पिता को बच्चों से आस। 
वैसे भक्त को, प्रभु दर्शन की है प्यास, जनता को ,प्रशासन से  आस।। 

देश विकास के लिए, करें सदा प्रयास, बहू-बेटियों की बचाना है लाज। 
घर-परिवार का, वृद्धि के संग हो सदा विकास, जब घर के बड़े-बुजुर्ग हो सरताज।।2।।
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