अभनपुर, रायपुर, छत्तीसगढ़
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विषय - सशक्तिकरण
विधा - *स्वैच्छिक कविता (छंदयुक्त/छंदमुक्त)*
नारी का सशक्तिकरण , इतना ही आवश्यक है ।
जितना अपने तन को चलाने, भोजन की जरूरत है ।।
नारी सबके लिए जरूरी , और समाज की धूरी है ।
फिर नारी को आगे बढ़ाने , अपना क्या मजबूरी है ।।
आओ मिलकर काम करें , नारी को आगे बढ़ाना है ।
पढ़ा लिखा कर अर्थ तंत्र की, जरूरत पूरा करना है ।।
नारी के प्रति हीन भाव को ,खुद से मर्दन करना है ।
सृजन शक्ति है नारी जिनका, हमको पोषण करना है ।।
लैंगिक भेद जो बना हुआ है , दूर उसे भी करना है ।
सभी क्षेत्र में नारी को , बराबर मौका देना है ।।
नारी सशक्तिकरण आवश्यक, हमको आज ही करना है ।
इनके बिना तो राष्ट्र है पंगु ,बात हमें ये समझना है ।।
बसंत कुमार "ऋतुराज"
अभनपुर
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