जिला,मुंगेली,
राज्य, छःगः,
विषय, सरताज,
शीर्षक, सरताज,
विधा कविता,
मोबाइल नंबर, 9981830087
भारत कभी दुनियां का सरताज
कुछ खामियां ने ले लिया,ताज
नैतिक अधोपतन बना कारण
अब फिर हो रहा वापसी,मोहन।।
10 सालों की चहुंमुखी विकास
गंगधार कल कल निनाद_रास
नारी की प्रतिष्ठा,सम्मान,महान
थल,जल,नभ,अंतरिक्ष में उड़ान।।
ज्ञान-विज्ञान,अर्थतंत्र,वाणिज्य,
साहित्य,राजनीति,शिक्षा,राज,
नर संग कदमतल करे मनोज,
आज भारत बदौलत उसके,सरताज।।
लाल का लालन-पालन,घर,
आंगन से उड़ान भरी नीलनभ,
उसका जज़्बा देखते बनता,धन
असंभव और नहीं कोई विधान।।
देश दुनियां के फक्र है रमणीक,
तेरा एकैक सोपान लक्ष्य,करीब
कवि,लेखक भी हैं प्रसन्नचित्त,
आज भारत फिर बने जग,सरताज,।।
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