ब्लॉक--आरंग
जिला --रायपुर
राज्य --छत्तीसगढ़
विषय- कविता
शीर्षक- *जलमग्न*
विधा--मुक्तछंद
मो.-९७५३१६४८८५
दिनांक-३०जून
*जलमग्न*
बचाना है तो जल बचाओ
सींचना है तो धरा को सींचों
भविष्य को देखो यही बताओ
जल संरक्षण की रीति सभी अपनाओं ।
तृप्त धरा होती जब जल मग्न हो जाती
शांत मन में भी देखो कैसे हिलोर मारती
जल के कण में है जीवन की अनुठी शक्ति
जो ग्रहण कर लें जल अमृत धार बन जाती।।
गंगा मैली नहीं होती मैली कर दी जा रही
अप्रयुक्त वस्तु देखो गंगा के गोद में पल रही
इसे न अमरता प्रदान करों गंगा मैया रो रही
सहोदर बन दिखाना है यही गंगा बोल रही।।
ज़र्रा ज़र्रा थर्रायेगा संकट में जब धरा आयेगा
संकटमोचन बन देखो धरा भी जब मुस्कुरायेगा
जल बचाओ पुण्य सफल करोगे जग खुशहाल होगा
प्रत्याशित प्राणी ही गंगा मैया के गोद में ही होगा।।
जल होगा, कल होगा, निश्चित ही जग होगा
मानना ही होगा देखो हमारा ही हर पल होगा
अंतिम इच्छा जब हम सबका संकल्प होगा
जल बचाओ जग बचाओ यह उक्ति सच होगा।।
कलमकार साहित्यकार रचनाकार
हरमन कुमार बघेल
(हरमन)
आरंग जिला-रायपुर
छत्तीसगढ़
9753164885
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