जिला-रायपुर
राज्य-छत्तीसगढ़
विषय, सरगम
शीर्षक, सरगम
विधा कविता,
मोबाइल नंबर, 9926179870
संगीत की हूँ मैं प्रियसी,
सात स्वरों का संगम।
सा रे ग म प ध नि ,
के,सुरों से बनी मैं सरगम।
मेरी खनक, सभी को भाती हैं।
कितने ही साज, सजाती हैं।
जिस पर होती माँ शारदे की कृपा,
सरगम उसकी हो जाती हैं।
मेरे सुर मीठे मिश्री जैसे,
मन-मस्तिष्क को सुकून दे जाते हैं।
ये जाती ,धर्म से कोसों दूर,
हर मन में घर कर जाते हैं।
सरगम संगीत का है गहना ,
इसका भी देखो क्या कहना।
यह मरहम सी ,ह्रदय की चोट पर,
तेरे दर्द को कम कर जाती हैं।
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