जिला- महासमुन्द
राज्य -छत्तीसगढ़
विषय -"बरसात"
विधा- दोहा छंद
संपर्क -9179134271
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प्यासी धरती है करे, आकुल करुण पुकार।
अब तो मेघा घिर चलो, बरसो मुसलाधार।।
सूरज खूब तपा गया, तृप्त करो संसार।
तुमसे सबको आसरा, दे दो चैन करार।।
हरियाली मैं ओढ़ के, सोलह करूँ सिंगार।
अंबर ताके है मुझे, दे दूँ थोड़ा प्यार।।
बेटा देख किसान अब, जोह रहे हैं बाट।
हलधर बलदाऊ बने, अजब तुम्हारे ठाट।।
मोर पपीहा नाच के, करे प्यार इजहार।
बरखा रानी आ ज़रा, करते हैं मनुहार।।
रिमझिम की फुहार लिए, आया है बरसात।
पुरवाई ठंडी बहे, डोल रहे हैं पात।।
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