Sunday, June 16, 2024

धमतरी से कुलदीप सिन्हा "दीप" की रचना- जिंदगी

कवि :-- कुलदीप सिन्हा "दीप"
जिला :-- धमतरी
राज्य :-- छत्तीसगढ़
विषय :-- जिंदगी
शीर्षक :- जिंदगी 
विधा :-- कविता ( छंद मुक्त )
संपर्क :-- 9165156535

सुख दुख का मेल है जिंदगी।
धूप छाँव का खेल है जिंदगी।

जो चलती हो केवल पटरी पर,
समझो गाड़ी रेल है जिंदगी।

जीवन में हो सुख ही सुख तो,
पाव भाजी व भेल है जिंदगी।

यहाँ कष्टमय हो जीवन जिसका,
उसके लिए सेंट्रल जेल है जिंदगी।

जहाँ भी जाओ कतार लगी है,
बिकट का रेलम पेल है जिंदगी।

"दीप" इसे कोई माने या ना माने,
ईश्वर का अद्भुत खेल है जिंदगी।

कुलदीप सिन्हा "दीप"
कुकरेल ( सलोनी ) धमतरी

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