Sunday, June 9, 2024

जयपुर से हरमन कुमार बघेल की रचना- पिता

रचयिता -- हरमन कुमार बघेल *(हरमन)*
ब्लॉक--आरंग
जिला --रायपुर
राज्य --छत्तीसगढ़
विषय- कविता
शीर्षक- पिता
विधा--छंदमुक्त
मो.-९७५३१६४८८५
दिनांक -९ जून

                *पिता*

पिता,पिता नहीं पुरी कायनात उसी की देन है।
प्रत्येक बेटा का आदर्श पिताजी ही सर्वश्रेष्ठ है।।

पिता बेटे के लिए बनते घोडे पीठ पर बिठाता है।
बेटा पिता के पीठ बैठकर दुल्हा जैसे इतराता है।।

पिता है तो पुरे जहान का हर हिस्सा अपना है।
दुनिया के बाजार का सभी किस्सा अपना है।।

पिता है तो बाजार के हर खिलौने अपने है।
खुद न उपयोग करता लेकिन हमें खरीद दे देते है।।

पिता होता है ऐसा पुरे परिवार को लेकर चलते है।
संसार की हर आवश्यकता को पुरा करते जाते है।।

पिता सिर्फ पिता नहीं पुरे परिवार का पालनहार है।
पिता अपने कंधे का भार स्वयं ढोता तभी पालनहार है।।

पिता का ख्वाहिश कोई न समस्याओं से घिरे रहे।
पिता का अपना आदर्शता सभी मेरे इर्दगिर्द रहे।।

पिता जब करता कमरतोड़ आदर्शता के कामों को।
हर सुविधा देता ऐसे प्रणाम बारम्बार अपने पिता को।।

जिनके सर पिता का साया हर काम पुरे होते है।
पिता का असीम आशीष वरदान ही वरदान होते है।।

हरमन के लिए आदर्श पिता हरमन धन्य हुआ है।
पिता का आदर्श उनके आदर्शता ही मान्य हुआ है।।

            रचनाकार कलमकार
             हरमन कुमार बघेल
                   (*हरमन*)
             आरंग जिला-रायपुर
                    छत्तीसगढ़

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