जिला- कोरबा
राज्य- छत्तीसगढ़
विषय -पिता
विद्या -गीत
मो.- 9399 432577
*पिता*
प्रथम गुरु माता होती है, जो दुनिया में लाती है। द्वितीय गुरु पिता होते हैं, जो दुनिया दिखलाते हैं।।
बोलने का चलने का जो, सद्ज्ञान कराते हैं ।
पिता हमारे सरताज हैं, जो सबका मान बढ़ाते हैं।।
पिता हमारे वीर हैं जो, बुराइयों से बचाते हैं।
खून पसीना गिरा के ,
जो हमको जिलाते हैं ।।
जो खुद कम रोटी खाके, हमें पेट भर खिलाते हैं। जो फटे-पुराने पहन के, हमें नए दिलवाते हैं ।।
हारने या टूट जाने पर, हमें गले से लगते हैं ।पास में अपने बिठाके, फिर हमें समझते हैं।।
इनका डांट-फटकार हमें, सदा आगे बढ़ाते हैं। हम ना समझ इनका, तिरस्कार करते हैं ।।
अनादर कर इनको ,जीते जी चिता पे लेटाते हैं ।इनसे न बड़ा भगवान, क्षमादान भी देते हैं ।।
सेवा कर लो इनका ,ये कल्याण ही करते है।
कृष्णा तुमसे कहती ,ये आशीर्वाद ही देते हैं।।2।।
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