Sunday, June 9, 2024

कोरबा से कृष्णा देवी कारकेल की रचना- पिता

कवयित्री- कृष्णा देवी कारकेल
जिला- कोरबा
राज्य- छत्तीसगढ़ 
विषय -पिता 
विद्या -गीत 
मो.- 9399 432577 

          *पिता*

प्रथम गुरु माता होती है, जो दुनिया में लाती है। द्वितीय गुरु पिता होते हैं, जो दुनिया दिखलाते हैं।।

बोलने का चलने का जो, सद्ज्ञान कराते हैं ।
पिता हमारे सरताज हैं, जो सबका मान बढ़ाते हैं।।

पिता हमारे वीर हैं जो, बुराइयों से बचाते हैं।
खून पसीना गिरा के ,
जो हमको जिलाते हैं ।।

जो खुद कम रोटी खाके, हमें पेट भर खिलाते हैं। जो फटे-पुराने पहन के, हमें नए दिलवाते हैं ।।

हारने या टूट जाने पर, हमें गले से लगते हैं ।पास में अपने बिठाके, फिर हमें समझते हैं।।

इनका डांट-फटकार हमें, सदा आगे बढ़ाते हैं। हम ना समझ इनका, तिरस्कार करते हैं ।।

अनादर कर इनको ,जीते जी चिता पे लेटाते हैं ।इनसे न बड़ा भगवान, क्षमादान भी देते हैं ।।

सेवा कर लो इनका ,ये कल्याण ही करते है।
कृष्णा तुमसे कहती ,ये आशीर्वाद ही देते हैं।।2।।

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