जिला- सरगुजा
राज्य-छत्तीसगढ़
विषय- पिता
शीर्षक- मेरे पिता
विधा- अतुकांत
मो.नं.-9131850712
*मेरे पिता*
गर्व है मुझे,मैं उस बगिया
का अंश हूँ।
जिस बगिया को सींचा मेरे पिता ने...
देखा व्यक्तित्व पिता का
आसमान से भी ऊँचा,
ऊपर से कठोर,अंदर से मोम
लगा लेते थे जब सीने से..
दूर हो जाते थे तब,दु:ख सारे..
स्वाभिमान की,संस्कारों की
शिक्षा से बाँध दिया जीवन सारा,
आन-बान-शान से जीना
सिखाकर,धन्य बना दिया,
जीवन हमारा...
कुछ टॉफी का लालच देकर
लिखवा लेते थे शुद्ध लेख प्यारा!
भरी-पूरी बगिया हमारी सूनी हो गई
पिता बिन माँ हमारी अकेली हो गई!
अब तो वे भी हमसे दूर पिता के पास चली गईं!
जीवन का यह कटु सत्य अपनाना है,
दुनिया में जो आया है उसे इक दिन जाना है।
मेरे पिता सदा मेरी यादों में जीवित रहेंगे,
हर पल मेरा विश्वास,मेरा बनकर गुरुर साथ रहेंगे!!
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शशि मित्तल "अमर"
मौलिक एवं स्वरचित
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