जिला,मुंगेली,
राज्य, छःगः,
विषय, अंधेरा
शीर्षक, अंधेरा,
विधा कविता,
मोबाइल नंबर, 9981830087
अंधेरा है नास्तिक का सूचक,
तम कहें या अंधेरा,अज्ञान,रूप
परिवर्तन भी है सार मनु,जीवन
प्रभात आता,लिए ओज धन।।
सूर्योदय बाद गायब,अंधेरा,
केवल उजाले का ही बसेरा,
उसी तरह,ज्ञान आते दूर तम,
जैसे बसंत आते दूर बसंत।।
समयचक्र का है यह खाशियत,
न सदा दुख,कभी सुख बरसात
जीवन में उतार-चढ़ाव,जहांर,
भाटा का सिलसिला,चले,मुरार।।
अंधेरा से मत ड़र,सिख,संदेश,
उषाकाल होगा प्रीतम,आगोश,
सिन्दूरी फिटा सूर्य,से उजाला,
नास्तिकता भी दूर,सह,प्रकाश
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