ब्लॉक--आरंग
जिला --रायपुर
राज्य --छत्तीसगढ़
विषय- कविता
शीर्षक- अंधेरा
विधा--छंदमुक्त
मो.-९७५३१६४८८५
दिनांक -१३जून
*अंधेरा*
ये अंधेरा क्यूँ ,डेरा डाला रे
तेरे आते ही ,छा जाता तम रे
ये साया बड़े डरावनी तेरा रे
न आना किसी के जीवन रे।।
सुख भोगी सभी,न डार यहां रैन बसेरा रे
कभी भी तुझे किसी ने,परेशान न किया रे
फिर हमें क्यूँ परेशान करने यहां आया रे
चला जा अपनी लोक,यहां न मचा शोर रे।।
हम तो तूफानों को भी चीरते हैं रे
नहीं चलने देंगे यहां तेरा हुकुमत रे
हम फौलादी,चलने देंगे न तेरा साया रे
हम नहीं स्वार्थी,चलते अपने पाने रास्ता रे।।
तेरी करतूत छलिया जैसे रे
माया जाल बिछाया कैसे रे
अपना माया से हमें न मोह रे
हम हिम्मत वाले,चलेगा नहीं तेरा रे।।
हरमन को न भय,चलता सीना तान रे
हम मतवाले उन्मुक्त गगन के,हमें भय कहां रे
अंधेरे को उज्जवलित करते,उजाला ही लाते रे
पहरेदारी उजाला के,नहीं डरते अंधियारे से रे ।।
रचनाकार कलमकार साहित्यकार
(हरमन)
आरंग - रायपुर
छत्तीसगढ़
9753164885
No comments:
Post a Comment